
परिवहन विशेष। एसडी सेठी। रेल में सफर करने वाले यात्रीगण कृपया ध्यान दें। भारतीय रेलवे ने साल 2027 तक सभी यात्रियों को कन्फर्म टिकट मुहैया कराने का दावा किया है। रेल मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अगले 3-4 साल में करीब 3000 और नई ट्रेनों को पटरी पर उतारने की योजना है। रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक अभी सलाना 800 करोड मुसाफिर ट्रेन में सफर करते हैं। इस संख्या को 1000 करोड तक बढाने का टार्गेट है। सूत्रों के मुताबिक ट्रैवल टाइम कम करने को लेकर काम चल रहा है, इसके साथ रेल-ट्रैक, स्पीड और एक्सीलरेशन और डेसिलरेशन को बढाने पर काम तेजी से किया जा रहा है जिससे ट्रेन रूकने और रफ्तार पकडने में पहले के मुकाबले कम वक्त लेगा। रेलवे की स्टेडी के मुताबिक दिल्ली से कोलकाता जाने में 2 घंटे 20 मिनट का टाइम बच सकता है बशर्ते एक्सीलरेशन और डेसिलरेशन को बडा दिया जाए। रेलवे से जुडे सूत्रो के मुताबिक फिलहाल करीब 225 ट्रेन सालाना (एलएचबी) वाले कोच बनाए जा रहे है जिसमें पुश-पुल टेक्निक का इस्तेमाल हो रहा है। वहीं इसी टेक्निक से ‘वंदे भारत’ ट्रेनों में एक्सीलेशन और डेसिलरेशन की क्षमता अभी चल रही ट्रेनों से 4 गुना ज़्यादा है। रेल मंत्री अश्विन वैष्णव की ओर से मीडिया को दी गई सूचनाओ के मुताबिक देश की तमाम कोच फैक्ट्रियो में दिन-रात काम किया जा रहा है। यह तसल्ली उस वक्त आई है जब तीज-त्यौहारों के चलते रेलगाड़ियां ठसाठस भरी हुई है और यात्रीगण अमानवीय हालात में सफर करने को मजबूर है। यह कोई अनोखी बात नहीं है गर्मी की छुट्टियों या त्योहारों के आसपास ऐसे दृश्य आम दिख जाते हैं। ऐसे में रेलवे को आम लोगों के सुलभ -आसान, और सुविधाजनक सफर को बनाना लक्ष्य है और सरकार की जिम्मेदारी भी। बता दें कि अगर यहां तय लक्ष्य तक पहुंचना है तो इस बीच हर साल 4000-5000 किलोमीटर की नई पटरियां बिछाने होगी। वहीं 3000 नई ट्रेनें और शुरू करने का मतलब है रोज 2-3 ट्रेने शुरू करनी होगी। सूत्रों के मुताबिक अभी रोजाना 10748 ट्रेने चल रही है इसे 13000 ट्रेन तक बढाने का लक्ष्य रखा गया है और साथ ही स्पीड बढ़ाने का। भारत देश की जनता और रेल यात्रियों की शंका है कि घोषित रेलवे की नई योजनाएं कही चुनावी स्टंट तो नहीं?